Gulf money fueling Muslim extremism in Kerala

July 5, 2013 by  
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New Delhi, July 03, 2013: Kerala’s Muslims have prospered largely thanks to the Gulf Boom, but over the past four decades the phenomenon has also led to an apparent spurt in extremist tendencies among the minority community, throwing up yet another paradox in a state known for paradoxes.

Gulf Boom Pits Muslims against others in Kerala

Every time the chief Muslim party, Indian Union Muslim League (IUML), flexes its political muscles and seeks more representation in the Congress-led government, the focus shifts to ‘radical Islam’. None other than the state Congress president, Ramesh Chennithala, recently accused the recalcitrant ally of being a “liability”.

The IUML, which has 20 MLAs and five ministers in the 140-member assembly, has often come under attack – even from defence minister AK Antony – for using its “bargaining power” in a minority government to secure ministerial and other administrative perks. The party has come under sharp criticism for nominating a former long-time security guard of industries minister and IUML leader P K Kunhalikutty as the regional passport officer of Malappuram – the CBI has initiated a probe into irregularities in issuing passports by this former gunman, K Abdul Rasheed, whose “out of turn” appointment itself had generated controversy. It has also been demanding bifurcation of the Muslim majority district of Malappuram to gain an additional Lok Sabha seat in the 2014 general elections.

The IUML, according to renowned historian MGS Narayanan, who was a chairman of the Indian Council for Historical Research (ICHR), used to be a “relatively secular party like the Congress”. Lately, however, he says, it has been trying to outwit radical elements such as the Popular Front of India (PFI) through its constant “pro-Muslim posturing”, and in the process contributing to polarisation along communal lines in the country’s most literate state. The state’s self-government department, held by IUML, had issued a circular that legalised marriages of Muslim women in the age group of 16 to 18 and men below 21. In the face of protests, the circular was amended.

Last year, Prime Minister Manmohan Singh had listed Kerala – a state that economists such as Professor Amartya Sen and others have used as a case study to highlight the paradox of high social indicators despite low growth – along with the likes of J&K and Assam that are seeing a spurt in extremist religious fervour.

Indoctrination, Identity

A major chunk of the estimated 60,000 crore in remittances that Kerala receives is contributed by Muslim migrants and Malappuram tops the list of beneficiaries among all its 14 districts. The Muslims, who form more than a quarter of Kerala’s total population, are not only more economically advanced but also politically more powerful compared with the Muslims in the other states. Among all communities in the state, only Muslims have positive population growth – something that has prompted the Church to discreetly encourage more than two children per family.

– the economic times

खाड़ी की दौलत से केरल में बढ़ रहा धार्मिक उन्माद?

नई दिल्ली।। केरल में मुस्लिम समुदाय के लोगों की इनकम बढ़ाने में काफी हद तक खाड़ी देशों के इकनॉमिक बूम का योगदान है, लेकिन पिछले 4 दशक के दौरान बढ़ी इस ताकत के कुछ नेगेटिव पहलू भी सामने आ रहे हैं। इससे समुदाय के कुछ लोगो में रैडिकलिज़म को भी हवा मिली है।

यह रुझान राज्य की मुख्य मुस्लिम पार्टी ‘इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल)’ के रवैये में देखा जा सकता है। जब यह पार्टी राज्य में कांग्रेस की लीड वाली सरकार में ज्यादा पावर पाने की जिद पर अड़ती है, तो फोकस एक बार फिर ‘रैडिकल इस्लाम’ की तरफ चला जाता है। हाल ही में राज्य में कांग्रेस यूनिट के प्रेज़िडेंट रमेश चेनिथला ने भी राज्य सरकार की अपनी इस सहयोगी पर ‘बोझ’ बनने का आरोप लगाया था।

राज्य की 140 मेंबर वाली विधानसभा में आईयूएमएल के 20 एमएलए हैं और इसके 5 मेंबर सरकार में मंत्री हैं। यह पार्टी कितनी कुख्यात हो चुकी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रक्षा मंत्री ए.के एंटनी भी इसकी आलोचना कर चुके हैं। एंटनी ने इस पार्टी पर राज्य की माइनॉरिटी सरकार में मिनिस्टरी और अन्य फायदे हासिल करने के लिए अपनी ‘बार्गेनिंग पावर’ का यूज़ करने का आरोप लगाया।

पार्टी के कई और फैसलों की जबरदस्त आलोचना हुई है। पार्टी ने इंडस्ट्री मिनिस्टर और अपने नेता पी.के कुणालिकुट्टी के सुरक्षा गार्ड रहे के. अब्दुल राशिद को मल्लापुरम का रीजनल पासपोर्ट ऑफ़िसर नॉमिनेट किया था, जिस पर काफी कॉन्ट्रोवर्सी हुई। यही नहीं पार्टी ने 2014 के लोकसभा चुनाव में एक और लोकसभा सीट पाने के लिए मुस्लिम समुदाय की अधिक पॉप्युलेशन वाले मल्लापुरम ज़िले को दो भाग में बांटने की मांग पर भी अड़ी हुई है।

जानेमाने हिस्टोरियन एमजीएस नारायणन का मानना है कि आईयूएमएल भी पहले कांग्रेस का तरह ही एक सेक्युलर पार्टी थी, लेकिन बाद में यह PFI जैसी रैडिकल संगठनों को पीछे छोड़ उन्हें सपोर्ट करने वाले वोटबैंक को झटकने के खेल में लग गई। पिछले साल पीएम मनमोहन सिंह ने भी केरल में बढ़ रहे धार्मिक उन्माद की चर्चा करते हुए इसकी तुलना जम्मू-कश्मीर और असम से की थी।

गौर करने वाली बात यह है कि केरल में दूसरे देशों से आने वाली लगभग 60,000 करोड़ की रकम में एक बड़ा हिस्सा मुस्लिम माइग्रेंट्स भेजते हैं। इसमें भी मल्लापुरम ज़िला सबसे टॉप पर है। नारायणन कहते हैं कि मुस्लिम माइग्रेंट्स जब खाड़ी देशों से लौटते हैं, तो उनमें इस्लाम के लिए रुझान काफी बढ़ जाता है। वे धर्म के नाम पर काफी खर्च भी करते हैं। नारायणन ने बताया कि हिंदू संगठनों को भी अब विदेशों से काफी रकम मिल रही है। उन्होंने कहा कि हिंदू और मुस्लिम, दोनों धर्मों में धार्मिक उन्माद काफी बढ़ रहा है।

हालांकि एम.जी राधाकृष्णन जैसे राजनीतिक विशेषज्ञों की सोच इससे अलग है। उनका मानना है कि राज्य के मुस्लिम समुदाय में दिख रहा धार्मिक उन्माद चरमपंथ जैसा नहीं है। उन्होंने कहा, ‘राज्य में मुस्लिम समुदाय अब पहले के मुकाबले ज्यादा धनी हुआ है और वह अपनी पहचान को लेकर भी काफी सजग रहता है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है।’

– navbharattimes

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